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कविता संग्रह

Ye Ishq Hai by Vandana Yadav (published by Advik Publication)

ये इश्क़ है
2022

प्रकाशक - अद्विक पब्लिकेशन

'ये इश्क़ है' अद्विक प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कविता संग्रह वंदना यादव की 93 कविताओं का संकलन है। संग्रह की कविताओं में परिवार, रिश्ते, बचपन, रोमांस, विरह, आध्यात्म और प्रेम के जितने भी रूप हैं, लगभग हर एक स्वरूप कविताओं में मौजूद है। पाँच खंडों में जीवन और जीवन से जुड़े अलग-अलग मूड की कविताएँ पाठकों को जीवन का उत्सव मनाती हुई दिखाई देंगी।

Urdu translation titled Kaun Aayega by Vandana 'Pushpender' Yadav (published by Kalawati Prakashan)

کون ایگا
2010
प्रकाशक - कलावती प्रकाशन
उर्दू दोस्त फ़ाउंडेशन द्वारा अनुवाद

वंदना यादव की हिंदी कविताओं का उर्दू अनुवाद, जिनमें प्यार और रिश्तों से लेकर सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों तक, हर तरह के विषयों को शामिल किया गया है। इस अनुवाद में उनके पहले दो कविता-संग्रहों - 'तुम कुछ कह दो' और 'कुछ कह देते' - की कविताएँ शामिल हैं।

Kuch Keh Dete by Vandana 'Pushpender' Yadav (published by Kalawati Prakashan)

कुछ कह देते
2009
प्रकाशक - कलावती प्रकाशन (हरियाणा साहित्य अकादमी के अनुदान योजना से प्रकाशित)

हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित, 'कुछ कह देते' वन्दना यादव का दूसरा कविता संग्रह है। 80 प्रष्टों के इस संग्रह में अलग-अलग मूड की कुल 48 कविताएं संकलित की गई हैं। संग्रह की कविताएं स्त्री मन की कोमल भावनाओं, प्रेम-वात्सल्य, मिलन और विरह के साथ मित्र-परिचितों के सुख-दुःख को भी आवाज़ देती हैं। कवयित्री अपनी दुनिया से बाहर निकल कर देश और समाज के प्रति अपना अलग नजरिया, अलग सोच भी रखती हैं।

Tum Kuch Keh Do by Vandana 'Pushpender' Yadav (published by Amar Bharti Sahitya Sanskriti Sanstha)

तुम कुछ कह दो
2007
प्रकाशक - अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्था

'तुम कुछ कह दो' कविता संग्रह, वन्दना यादव का पहला प्रकाशित काव्य संकलन है। इस संग्रह की 86 कविताओं में कवयित्री स्व से लेकर समाज, देश और प्रकृति तक की यात्रा को सहजता से तय कर लेती हैं। संग्रह की कविताओं में वन्दना यादव अपने मन की कोमल भावनाओं के साथ जब समाज के वंचितों की बात उठाती हैं तब कविता का स्वर यकायक बदल जाता है। इससे इतर वह महिलाओं के शोषण, उनके त्याग और अधिकारों पर भी अपनी कलम चलाने से नहीं चूकती। भारत-पाकिस्तान जैसे विषय के साथ ही साथ, प्रकृति को समर्पित अनेक कविताएं इस संग्रह में शामिल हैं। संग्रह की कुछ कविताएं पाठकों को भावुक भी कर देती हैं। प्रेम, प्रकृति और समाज के प्रति सचेत रहने वाले पाठक, 'तुम कुछ कह दो' कविता संग्रह की कविताएं को आवश्य पसंद करेंगे।

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