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लेखक के बारे में

वंदना यादव साहित्यकार, मोटिवेशनल स्पीकर और समाजसेवी है। आपने एक दर्जन से
अधिक पुस्तकों की रचना की है। आपने दस पुस्तकों का संपादन भी किया है। वंदना जी
की पुस्तकों का अंग्रेजी, उर्दू, उड़िया, मराठी, हरियाणवी आदि भाषाओं में अनुवाद हुआ है।

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वंदना यादव का प्रथम उपन्यास 'कितने मोर्चे' हिन्दी का अपनी तरह का पहला उपन्यास है।

यह सैनिक पत्नियों के जीवन को केंद्र में रखकर लिखा गया है। इसके बाद मृत्यु संस्कार

पर लिखा गया 'शुद्धि' उपन्यास प्रकाशित हुआ। वर्ष 2026 में 'पंजा' शीर्षक से तीसरा

उपन्यास प्रकाशित हुआ। यह उपन्यास भारतीय नस्ल के वेटरन डॉग की कथा कहता है।
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उपन्यास के साथ वंदना यादव ने बालकों के लिए भी अनेक पुस्तकें लिखी हैं। 'चिखुरी' (बाल उपन्यास) 'नीला आसमान' (कविता संग्रह) 'पिकनिक और कहानियाँ' (कहानी संग्रह) तथा 'हिमालय सिरमौर सिक्किम' (यात्रा-वृत्तांत) के माध्यम से आपने अलग-अलग विधाओं में रचनाकर्म किया है। नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया द्वारा प्रकाशित 'सब्जियों वाले गमले' (कहानी की पुस्तक) के आठ संस्करण आ चुके हैं तथा इसकी अब तक 5 लाख से अधिक प्रतियाँ पाठकों द्वारा खरीदी जा चुकी हैं। इस पुस्तक को राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश क राज्य सरकारों के 'बुलबुल प्रोजेक्ट' में भी शामिल किया गया है।

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कथा साहित्य के साथ कथेतर साहित्य में भी वंदना अपनी उपस्थिती दर्ज करवाती है। इसमें सिक्किम पर दो यात्रा-वृत्तांत 'सिक्किम स्वर्ग एक और भी है' वयस्क पाठकों तथा 'हिमालय सिरमौर सिक्किम' बालकों के लिए लिखे गए हैं। रचनाकार का संस्मरण 'आई डोंट लाइक यू' आपके बचपन की स्मृतियों तथा अन्य छोटे-छोटे प्रसंगों को समेटता है। इसके साथ आपने तीन 'सेल्फ हेल्प बुक' (मोटीवेशनल पुस्तकें) भी लिखी हैं। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सेना परिवेश से आने वाली वंदना यादव ने भारतीय सेना से संबंधित कथा तथा कथेतर साहित्य की पुस्तकों का संपादन भी किया है। यह पुस्तकें हिन्दी साहित्य के समृद्ध खजाने में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

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वंदना यादव की कहानियाँ साहित्य अमृत, हरिगंधा और जनसत्ता के दीपावली विशेषांक में प्रकाशित हुई हैं। आप नियमित रूप से एनडीटीवी और जनसत्ता जैसे राष्ट्रीय मंचों के साथ-साथ जानकी पुल और पुरवाई सरीखे साहित्यिक मंचों के लिए भी लिखती हैं। वंदना यादव के लेखन में महिला अधिकारों, मानसिक स्वास्थ्य, सांस्कृतिक संरक्षण और सम-सामयिक विषयों सहित अनेक मुद्दे शामिल होते हैं।

Hindi author Vandana Yadav
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