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Aaj Ki Lakshmibai by Vandana Yadav (published by Prabhat Prakashan)

आज की लक्ष्मीबाई
2026

प्रकाशक - प्रभात प्रकाशन
शैली - डायरी संकलन

सेना परिवेश में पूरा देश एक साथ दिखाई देता है। इसी माहौल को लेखिका वंदना यादव ने एक सैनिक पत्नी की तरह जीया मगर अपने आस-पास की महिला अधिकारियों से इसके दूसरे रूप को जाना। घर की लाड़ली बिटिया का हाड़तोड़ ट्रेनिंग के बाद सैनिक बनना। सेना पुरुषों का अधिकार क्षेत्र है, इस दुनिया में अपने कदम जमाना। जंगलों-पर्वतों में ऑपरेशन और कोविड के समय 'वर्क फॉर नेशन' करना। ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन के छक्के छुड़ाना। 'फेमिना' पत्रिका द्वारा इनकी बहादुरी को कवर पेज पर सेलिब्रेट करना। महिला सैनिकों के जीवन को जानने-समझने का मौका आसानी से नहीं मिलता। एक अल्हड़ युवती का सैनिक के रूप में कायापलट कैसा रहा होगा! यह और ऐसे अनेक सवाल सबके मन में आते हैं। महिला सैन्य अधिकारी का जीवन कैसा होता है, इस बारे में जानने की चाह होती है। इसी मंशा को पूरा करने के उद्देश्य से इस पुस्तक की रचना हुई है। भारतीय सेना अपनी बहादुरी, त्याग और बलिदान के लिए पहचानी जाती है। यहाँ स्त्री-पुरुष के भेद के बिना जिम्मेदारी तय होती है। जबकि महिलाओं से उम्मीद होती है कि वह परिवार और रिश्तों के लिए संवेदनशील रहकर खाद-पानी का काम करती रहें। इससे उलट सैनिक की वरदी सबसे पहले संवेदनशीलता से दूरी बनाने की ट्रेनिंग देती है। यह जीवन 'सेल्फलैस' होने की माँग करता है। महिलाएँ पीढ़ियों से परिवार को सर्वोपरि मानती आई हैं। इस सोच से जुड़ी महिलाओं का सैनिक बनना क्या आसान रहा होगा ? सैनिक बनने की कठोर प्रैक्टिस ने इन महिलाओं को कैसे सोने से कुंदन बनाया ! यह और ऐसे अनेक सवाल-जवाब इस पुस्तक में शामिल हैं।

Sainik Patniyon Ki Katha Aur Vyatha by Vandana Yadav (published by Prabhat Prakashan)

सैनिक पत्नियों की कथा और व्यथा
2025
प्रकाशक - प्रभात प्रकाशन
विधा - डायरी संकलन

सेना हमारे देश का सबसे ज्यादा अनुशासित तंत्र है। यहाँ हर रणनीति मैदान पर उतारने से पहले कागज पर उतारी जाती है। हर छोटी-बड़ी बात को कलमबद्ध किया जाता है। इतनी व्यवस्थित संस्था में भी महिलाओं के योगदान का दस्तावेजीकरण नहीं किया गया। इस बात से समझा जा सकता है कि यहाँ भी महिलाओं के योगदान को अनदेखा कर दिया गया। असल में सेना ऐसा संस्थान है, जहाँ एक व्यक्ति की आय में दो लोग काम करते हैं और वह भी सातों दिन, चौबीसों घंटे! कैंटोनमेंट का जीवन सिविलियन परिवेश से बिल्कुल अलहदा जीवन है। यह सच है कि सेना समूचे देश की नुमाइंदगी करती है। यह भी सच है कि सैनिक और उसकी पत्नी मूलतः देश के आम नागरिक ही होते हैं, जिन्हें सेना की भाषा में सिविलियन कहा जाता है। वही सिविलियन जब सैनिक जीवन को अपना लेते हैं, तब उनके सोचने, व्यवहार करने और जीने का तरीका बदल जाता है। सैनिक पत्नियाँ हर दो वर्ष बाद खुद को बार-बार दूसरों की कसौटी पर खरा उतरने का दबाव भी झेलती हैं। इसके साथ यदि वे अपना कॅरियर बनाने की चाह रखती हैं, उस स्थिति में उनके पास अंतहीन संघर्षों की कड़ियाँ जुड़ती चली जाती हैं। इन सबके बावजूद इस समाज में एक बहुत लोकप्रिय कथन साधिकार फैला हुआ है- हालात चाहे जितने खराब हों, हमें एन्जॉय करना आता है, क्योंकि हम फौजी हैं।

Sainik Patniyon Ki Diary by Vandana Yadav (published by Prabhat Prakashan)

सैनिक पत्नियों की डायरी
2024
प्रकाशक - प्रभात प्रकाशन
विधा - डायरी संकलन

सैनिक अधिकारियों की पत्नियों को ‘मेमसाहब’ कहा जाता है। यह उच्चारण अंग्रेजी हुकूमत के दौरान सैनिक पत्नियों के लिए प्रयोग होता था, जो कमोबेश आज भी इस्तेमाल हो रहा है। वर्तमान दौर की मेमसाहबें हमारी संस्कृति में रची-बसी महिलाएँ हैं, जो भारत के गाँव-शहरों से लेकर हर राज्य से आती हैं, यानी इन महिलाओं में समूचा भारत एक साथ दिखाई देता है। ये महिलाएँ हर दो-अढ़ाई वर्ष में पति के पीछे-पीछे अपने बच्चों के साथ गृहस्थी समेटकर ‘पोस्टिंग’ पर चल पड़ती हैं। ऐसी महिलाओं के नजरिए से देश-समाज और सेना कैसी दिखती है? 1971 के युद्ध के समय या श्रीलंका में शांति सेना की भूमिका निभा रहे सैनिकों के पीछे उनकी पत्नियों का जीवन कैसा था? कारगिल युद्ध और ऑपरेशन पराक्रम के कालखंड में सैनिक पत्नियाँ किस किरदार में थीं? युद्ध काल के समय के अतिरिक्त शांति काल में तथाकथित ‘मेमसाहब’ क्या करती हैं? असलियत में इन महिलाओं की दुनिया कैसी है? इनका जीवन कैसा होता है? सीमा पर पति की तैनाती के समय अथवा किसी ऑपरेशन पर चले जाने के बाद इन महिलाओं के जीवन में क्या बदलाव आते हैं या इनका जीवन सामान्य तरीके से चलता रहता है? ‘सैनिक पत्नियों की डायरी’ में यही बताने का प्रयास किया गया है। भारतीय शूरवीरों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर उन्हें सतत राष्ट्रधर्म निभाने की प्रेरणा देती मातृशक्ति के त्याग-समर्पण-निष्ठा और कर्तव्य-निर्वहन की ये सच्ची गाथाएँ पाठकों के मन में उनके प्रति और अधिक श्रद्धा उत्पन्न कर देंगी।

Zindagi Aur Maut Ke Beech: Sainiko Se Judi Kahaniyan by Vandana Yadav (published by Pralek Prakashan)

ज़िंदगी और मौत के बीच: सैनिकों के जीवन से जुड़ी कहानियाँ
2021
प्रकाशक - प्रलेक प्रकाशन
विधा - कहानी संग्रह

हम महफूज हैं क्योंकि हमारे हिस्से के ख़तरे सैनिक अपने उपर ले लेते हैं। अपनी जिम्मेदारियों को पत्नी के कंधों पर ड़ाल कर सैनिक देश की सुरक्षा का भार उठाता है। दोनों पक्ष अलग-अलग मोर्चे सम्हालते हैं। सैनिकों के जीवन के अलग-अलग रंगों से जुड़ी कहानियों का संग्रह है - ज़िंदगी और मौत के बीच:सैनिक जीवन से जुड़ी कहानीयाँ। वंदना यादव ने इस कहानी संग्रह का संपादन किया है।

Kusum Ansal: Ek Mulyankan - Kathetar Sahitya by Vandana Yadav (published by Samyik Prakashan)

कुसुम अंसल: एक मूल्यांकन - कथेतर साहित्य 
2022
प्रकाशक - सामयिक प्रकाशन
विधा - सम्पादन

वरिष्ठ रचनाकार कुसुम अंसल का कथेतर साहित्य विपुल है । उनका आत्मकथात्मक लेखन, नाटक, कविताएं, यात्रा वृत्तांत, सीरियल लेखन सहित वह स्वयं को अनेक विधाओं में अभिव्यक्त कर चुकी हैं । यह पुस्तक कुसुम अंसल की अध्येता वन्दना यादव ने बड़ी संलग्नता से सम्पादित की है । कुसुम अंसल के निकट परिसर के सभी महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों के आलेख इस पुस्तक को पठनीय बनाते हैं । कन्हैयालाल नंदन, कमल किशोर गोयनका, गुरुचरण सिंह, कीर्तिकेसर, विश्वमोहन तिवारी, पद्मा सचदेव, नासिरा शर्मा, बासु भट्टाचार्य, वीरेन्द्र सक्सेना, सरोज वसिष्ठ और शैलेश जैदी सहित अनेक सम्मानित लेखकों के लेख कुसुम अंसल के व्यक्तित्व, रचना जगत और समय की व्याख्या करते हैं । कुसुम अंसल का ‘आत्म कथ्य : कैथार्सिस’ इस पुस्तक की उपलब्धि है । जो पाठक कुसम अंसल के व्यक्तित्व को समझना चाहते हैं, उनके लिए यह एक पठनीय पुस्तक है। वंदना यादव द्वारा अनेक साहित्यकारों से आलेख तैयार करवाने, सामाग्री को पुस्तकाकार देने, बार-बार प्रूफ रीड करने तथा संपादकीय से पुस्तक पठनीय बन गई है।

Kusum Ansal: Ek Mulyankan - Katha Sahitya by Vandana Yadav (published by Samyik Prakashan)

कुसुम अंसल: एक मूल्यांकन - कथा साहित्य
2022
प्रकाशक - सामयिक प्रकाशन
विधा - सम्पादन

महिला रचनाकारों में पहली आत्मकथा लिखने वाली कुसुम अंसल का कथा साहित्य विपुल है । उनकी रचनाएं पारम्परिकता और आधुनिकता के अद्भुत मेल से निकली हैं । भाव चित्रों से अनुसंधान की कगार तक निकल जाना इस रचनाकार का मूल स्वभाव रहा है । वन्दना यादव के सम्पादन में आई यह मूल्यांकन पुस्तक कुसुम अंसल के कथाकार को बहुविध रूप में देखती– समझती है । स्त्री मनोविज्ञान की गूढ़ आकृति हो या मुखर खामोशी, जीवन का सार तत्व उकेरना हो या जीवन्त प्रश्नों को उभारना, हाल–बेहाल विधवाओं की जुबां बनना हो या मानवीय चेतना पर दस्तक देना, कठघरे से बाहर आने की कसक हो या समाज की मूल सच्चाईयां उजागर करना, कुसुम अंसल का कथा साहित्य अलग ही ढंग का है । उस पर अपने समय के उल्लेखनीय रचनाकारों, आलोचकों और सम्पादकों ने इस पुस्तक में पूरे मन से विचार किया है । निश्चय ही वंदना यादव द्वारा संपादित यह पुस्तक लेखिका की रचनात्मकता पर ऐसा प्रथम कार्य है जो शोधार्थियों, शिक्षकों, युवा समालोचकों के लिए एक संग्रहणीय दस्तावेज बन सका है।

Amar Lekhak-Shayar Rifat Saroash by Vandana Yadav (published by PSRS Akademi)

अमर लेखक-शायर रिफ़त सरोश
2014
प्रकाशक - PSRS अकादमी
विधा - सम्पादन

रिफ़अत सरोश की उर्दू कवितायें देवनागरी लिपि में। पुस्तक के दूसरे भाग में कलाकारों, लेखकों तथा कवियों के रिफ़अत सरोश के बारे में विचार। वंदना यादव ने लेखक और शायर रिफ़त सरोश की रचनाओं में संपादकीय सहयोग दिया।

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